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       बिहार की शिक्षा व्यवस्था >>>>>हाय 

       बिहार की शिक्षा व्यवस्था >>>>>हाय 

सम्पादक की कलम से >>>>
                                
                                                   बिहार की शिक्षा व्यवस्था >>>>>हाय 


सरकारी विद्यालय में दिन प्रतिदिन पढाई चौपट देखी जा रही एवं आला हाई कमान का निर्देश कठोर .....मैट्रिक की परीक्षा में नकल एवं चोरी करने को रोकने के लिए  परीक्षार्थी को जूता  एवं मौजा पहनकर आने पर प्रतिबन्ध लगाना,जींस पेंट पहनकर परीक्षा केंद में प्रवेश करने पर बदन को खोलवाकर नंगा करना शिक्षा विभाग के लिए बड़ी ही  सराह्निये कार्य रहा ,दुसरी तरफ देखा जाय तो बिहार की शिक्षा गुन्वातापूर्ण एवं सुदृढ़ नही है ,सता पार्टी के राजनेता से लेकर राज्य एवं केंद्रीय सरकार आमलोगों के बीच डीढोरा पीट रहे है की विद्यालय में गुन्वातापूर्ण शिक्षा दी   जा रही है ,जबकि देखने के आलम यह है की वर्ग 1से 8तक छात्रों को टेस्ट परीक्षा देने के समय सरकारी पाठ्य पुस्तक दिया गया ,वो   भी सतप्रतिसतको नही मिला   वर्ग 9 एवं 10के छात्रों को भी भविष्य अंधकारमय है ,जिन मिडिल    स्कुल को   उंच विध्यालय   में अपग्रेड किया गया वहा भी शिक्षक, भवन की कमी   है ,मिडिल स्कुल के लेभेल के शिक्षक से मैट्रिक के छात्र को पढ़ाने पर छात्रों को गुणवता पूर्ण शिक्षा नही मिल पाती है ,बहुत से विद्यालय में पठन   पाठन भी नही होता सिर्फ कागजी   खानापूरी होती   है ,इस   सन्दर्भ में खास  करके आम लोगो का भी  प्रसासनिक पदाधिकारी से विश्वाश उठ गयी की शिकायत करने पर  विद्यालय में सुधार तो नही होती परन्तु उन्चाधिकारी का काम बन जाता है तथा जेब मोटी हो जाती है |
सरकार के आला अधिकारी का नींद परीक्षा के समय खुलती है तथा तरह तरह के कठोर फरमान जारी करते है |यदि व्ही अधिकारी लोग परीक्षा  से   पूर्व पढाई के समय ही विद्यालय को  कड़ी निगरानी कर सुव्यवस्थित कर देते तो आज सरकार को इतनी परेशानी नही   होती तथा कदाचारमुक्त परीक्षा  होती |
                                                                                                                 के के संजय चीफ एडिटर पी न्यूज़
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